प्रेमचंद जयंती
पटना वीमेंस कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में पूरे कॉलेज की छात्राओं व शिक्षकों के लिए पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य था हिंदी साहित्य के कालजयी रचनाकार प्रेमचंद के महान व्यक्तिव व कृतित्व से सभी को परिचित कराना व हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित करना।
कार्यक्रम का उद्घाटन आदरणीया प्राचार्या डॉ सिस्टर एम रश्मि एसी द्वारा किया गया जिसके उपरांत प्राचार्या, अध्यक्ष, हिंदी विभाग व शब्दों का आईना साहित्यिक क्लब के संयोजक डॉ कुमार धनंजय एवं हिंदी विभाग के अन्य शिक्षकों द्वारा प्रेमचंद की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। छात्राओं ने स्वागत गान द्वारा कार्यक्रम का मधुर शुभारंभ किया जिसके पश्चात् डॉ कुमार धनंजय ने सभा का अभिवादन किया। हिंदी विभाग की द्वितीय वर्ष की छात्रा आरज़ू प्रवीन द्वारा प्रेमचंद को समर्पित एकल नाटक की प्रस्तुति दी गई जिसने सभी को भाव विभोर कर दिया। हिंदी विभाग की तृतीय वर्ष को छात्राओं आस्था व सृष्टि द्वारा बनाए गए दो वीडियोज़ के माध्यम से प्रेमचंद के व्यक्तिगत व साहित्यिक जीवन की झांकी दिखाई गई जिसके पश्चात् आदरणीया प्राचार्या ने छात्राओं को संबोधित करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया व पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विभिन्न विभागों की छात्राओं व शिक्षकों ने पुस्तक प्रदर्शनी का आनंद लिया व प्रेमचंद के रचना संसार से परिचित भी हुए। हिंदी विभाग की छात्राओं द्वारा प्रेमचंद के जीवन व लेखन से संबंधित विविध जानकारियाँ पोस्टरों द्वारा आगंतुकों को प्रदान की गई साथ ही पुस्तक प्रदर्शनी में आने वाली छात्राओं व शिक्षकों को पुस्तक खरीदने का भी अवसर मिला।इस अवसर पर हिंदी विभाग के सभी शिक्षक डॉक्टर मंजुला सुशीला,डाॅक्टर दीपा श्रीवास्तव, डाॅक्टर सुषमा चौबे और डाॅक्टर ब्रह्मानंद उपस्थित थे।इस अवसर पर छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्या ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी प्रासंगिक है और उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम सभी उनके साहित्य का अध्ययन करें और उनके विचारों को अपने आचरण में उतारें।
इस पुस्तक प्रदर्शनी में प्रेमचंद के व्यक्तिगत व साहित्यिक जीवन को पोस्टरों के माध्यम से जीवंत किया गया जिसके अंतर्गत चार विषय रखे गए:
1. प्रेमचंद: जीवन यात्रा जिसके अंतर्गत उनके परिवार के सदस्यों से लेकर मित्रों तक, उनके घर से लेकर उनके कॉलेज तक की दुर्लभ तस्वीरें प्रदर्शित की गई ।
2. कथाकार के रूप में प्रेमचंद जिसके अंतर्गत उनकी श्रेष्ठ कहानियों व उपन्यासों का विषय व उद्देश्य से संबंधित जानकारियाँ पोस्टरों के माध्यम से प्रदर्शित की गई।
3. साहित्यिक आलोचना जिसके अंतर्गत प्रेमचंद व उनकी रचनाओं पर आधारित विभिन्न आलोचकों के मत व आलोचनात्मक पुस्तकों को पोस्टरों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
4. प्रेमचंद और सिनेमा जिसके अंतर्गत प्रेमचंद की रचनाओं पर आधारित फिल्मों को पोस्टरों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।




