रेजोनेंस: भाषा एवं साहित्यिक उत्सव
पटना वीमेंस कॉलेज के अंग्रेज़ी, हिंदी, उर्दू एवं संस्कृत विभाग द्वारा रेजोनेंस: भाषा एवं साहित्यिक उत्सव का आयोजन किया गया जिसमें कार्यक्रम के पहले दिन आयोजित हुए उद्घाटन समारोह के अंतर्गत हिंदी विभाग की छात्राओं द्वारा बिहार व झारखंड की विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं जैसे भोजपुरी, उरांव, मगही, मैथिली में लोकगीत की प्रस्तुति दी गई। अंग्रेज़ी विभाग द्वारा आयोजित महफिल: कविता पाठ कार्यक्रम में हिंदी विभाग की कुल 7 छात्राओं ने ब्रजभाषा, मैथिली, अंगिका, मगही, भोजपुरी, मुंडारी, उरांव भाषाओं में कविताएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम के अंतर्गत संस्कृत विभाग द्वारा दिनांक 27/03/2025 को चित्रलेखा: श्लोकाधारित पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें पूरे महाविद्यालय से 3-3 छात्राओं के 16 समूहों में कुल 48 छात्राओं ने भाग लिया व प्रतियोगिता के समय प्रदान किए गए विभिन्न संस्कृत श्लोकों पर आधारित चित्रकारी कर अपनी चित्रकला का परिचय दिया। हिंदी विभाग से भी एक समूह ने भाग लिया। कार्यक्रम के दूसरे दिन हिंदी विभाग एवं शब्दों का आईना साहित्यिक क्लब द्वारा वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका विषय था: भ्रामक खबरों को प्रसारित करने में सोशल मीडिया की अपेक्षा मुख्यधारा का मीडिया ज़्यादा ज़िम्मेदार है इस प्रतियोगिता में पूरे महाविद्यालय से कुल 15 छात्राओं ने भाग लिया व प्रस्ताव के पक्ष एवं विपक्ष में महत्त्वपूर्ण तर्क प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में निर्णायक की भूमिका पटना वीमेंस कॉलेज के शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ प्रभास रंजन व डॉ नीतू चौहान ने निभाई। मौके पर शब्दों का आईना साहित्यिक क्लब के संयोजक व हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ कुमार धनंजय, हिंदी विभागाध्यक्षा डॉ मंजुला सुशीला, संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ स्मिता कुमारी व हिंदी विभाग के अन्य शिक्षक मौजूद रहे। साहित्य उत्सव के अंतर्गत आयोजित हुए रंगमंच: नाटक मंचन कार्यक्रम में हिंदी विभाग द्वारा अंधेर नगरी प्रहसन का मंचन किया गया जो प्रख्यात लेखक व खड़ी बोली हिंदी के जनक कहे जाने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित है व जिसका निर्देशन हिंदी विभागाध्यक्षा डॉ मंजुला सुशीला द्वारा किया गया। साहित्य उत्सव के अंतर्गत लगी भाषा प्रदर्शनी में हिंदी विभाग द्वारा बिहार की विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के प्रमुख साहित्यकार , सरहदों से परे हिंदी व डिजिटल हिंदी जैसे पोस्टर्स के माध्यम से रचनात्मक कौशल का परिचय दिया गया। इसके अलावा बिहार के धरोहर व लोक संस्कृति व आस्था के महापर्व छठ को 3डी मॉडल के माध्यम से दर्शाने का व मिथिला की समृद्ध संस्कृति को मधुबनी चित्रकला के माध्यम से दर्शाने का प्रयास किया गया।




