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हिन्दी कथाकारों की मानवीय संवेदना

Hindi                  

Explore –Journal of Research

                                    Peer Reviewed Journal

     ISSN 2278–0297 (Print)

                                                                                                ISSN 2278–6414 (Online)

                Vol. XIV No. 2, 2022

© Patna Women’s College, Patna, India

                                                         https://patnawomenscollege.in/explore-journal-of-research/

हिन्दी कथाकारों की मानवीय संवेदना

• वसुधा  • शिखा मुस्कान • पुनीता कुमारी • मंजुला सुशीला.

Received                   : December 2021

Accepted                   :  January 2022

Corresponding Author   : Manjula Sushila

संकेत-शब्द(Abstract) : कहानियाँ न सिर्फ साहित्य का बल्कि मानव जीवन का अभिन्‍न अंग है। प्रारम्भिक काल से ही कहानियों ने मानव-मन को लुभाने, मनोरंजन देने के साथ-साथ जीने की कला भी सिखाई है। जब ये बोली और घुनी जाती थी तब भी उतनी ही महत्वपूर्ण थी; जितनी आज लिखी और पढ़ी जाने पर।/ आज के कथाकारों ने अपनी लेखनी द्वारा मानवीय भावनाओं को समेटकर अपनी संवेदना को प्रकट करने का प्रयास किया है। आज हमारा समाज कई प्रकार के नकारात्मक आचरण व्यवहार अनैतिक भावना एवं नियमों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में समाज वर्ग-विभेद के चक्र में फ़ँस गया है, परिणामतः समाज में कुछ लोगों के प्रति नकारात्मक व्यवहार कर उनकी भावनाओं और आत्मा को ठेस पहुँचाया जा रहा है।ऐसे उपेक्षित वर्ग की श्रेणी में हम स्त्री: वृद्ध आदिवासी; दलित आदि की चर्चा करते हैं। हिन्दी साहित्य के कई लेखकों ने अपनी कहानियों द्वारा इन उपेक्षितों के ग्रति ना सिर्फ़ अपनी सहानुभूति प्रकट की है, बल्कि उन्होनें इनकी स्थिति में खुधार के युझाव भी दिये हैं। इस दृष्टिकोण से इस शोधपत्र द्वारा कुछ चुनिंदा कथाकारों की कहानियों के माध्यम से स्त्री; वृद्ध, दलित; आदिवासी एवं ब्रालकों की स्थिति पर विचार प्रकट किया गया है।

प्रेमचंद रचित बूढ़ी काकी, भीष्म साहनी की चीफ की दावत: उषा प्रियंवदा की वापसी” कहानी वृद्धों के श्रति संवेदना को दर्शाती है। वहीं स्त्री विमर्श के तहत अमरकांत ने दोपहर का भोजन: जैनेन्द्र की पत्नी: अज्ञेय की गैंग्रीन” जैसी कहानियाँ समाज में स्त्रियों की मार्मिक स्थिति को दर्शाती हैं। दलित वर्ग के ग्रति देखें तो कथाकारों में सर्वप्रथम प्रेमचंद (सद्‌गाति) ओमप्रकाश वाल्मीकि (सलाम), और नीरा परमार (वैतरणी) आदिकी कहानियाँ न प्िर्फ दलितों के शोषित-पीड़ित जीवन को दर्शाती हैं; बल्कि उनके प्रति समाज के नकारात्मक व्यवहार का खुलासा
भी करती हैं। ऐसे ही बालकों के ग्रति दुर्व॒वक्हार और नकारात्मक मानसिकता को जैनेन्द्र (शाजेबु) प्रेमचंद (ईदगाह), मार्कण्डेय (जूता) आदि ने अपनी कहानियों के माध्यम से प्रकट किया है । इन विषयों के अलावा भी कई ऐसे विषय हैं जिनपर हमने अपने शोधपत्र में चर्चा की है, जिसके माध्यमसे हिन्दी कथाकारों एवं अन्य भाषा के क॒थाकारों की मानवीय संवेदना प्रदर्शित होती है। इस विषय के चयन का उद्देश्य कथाकारों की संवेदना को पहचान कर समाज को उपेक्षित वर्ग के प्रति अपनी सोच को बदलने के लिए प्रेरित करना है।

Keywords : मानवीय भावनाएँ, नकारात्मक, अनैतिक, वर्ग-विभेद, सहानुभूति, उपेक्षित।

वसुधा
B.A. III year, Hindi (Hons.), Session: 2019-2022,
Patna Women’s College (Autonomous),
Patna University, Patna, Bihar, India

 

शिखा मुस्कान
B.A. III year, Hindi (Hons.), Session: 2019-2022,
Patna Women’s College (Autonomous),
Patna University, Patna, Bihar, India

 

पुनीता कुमारी
B.A. III year, Hindi (Hons.), Session: 2019-2022,
Patna Women’s College (Autonomous),
Patna University, Patna, Bihar, India

 

मंजुला सुशीला

अध्यक्षा, हिन्दी विभाग

पटना वीमेन्स कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय,

बेली रोड, पटना-800 004, बिहार, भारत

E-mail : manjula.hindi@patnawomenscollege.in